कमर्शियल लॉ और आर्बिट्रेशन
कमर्शियल मामले लड़े और दिल्ली इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (DIAC) की आर्बिट्रेशन कार्यवाही में सुनवाई के दौरान क्लाइंट की ओर से मुख्य बहस की।
दिल्ली इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर सहित संस्थागत और एड-हॉक आर्बिट्रेशन, तथा उनसे जुड़ी दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही।
कुमार अभिषेक एंड एसोसिएट्स नई दिल्ली से संस्थागत और एड-हॉक आर्बिट्रेशन संभालता है — जिनमें दिल्ली इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (DIAC) की कार्यवाहियाँ शामिल हैं, जहाँ चैंबर ने सुनवाई के दौरान मुख्य बहस की है।
चैंबर आर्बिट्रेशन एवं सुलह अधिनियम, 1996 के तहत आर्बिट्रेशन से जुड़ी अदालती कार्यवाहियों में भी पेश होता है — अंतरिम राहत के आवेदन, आर्बिट्रेटर की नियुक्ति, अवॉर्ड को चुनौती, अपील और प्रवर्तन — दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में।
कमर्शियल मामले लड़े और दिल्ली इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (DIAC) की आर्बिट्रेशन कार्यवाही में सुनवाई के दौरान क्लाइंट की ओर से मुख्य बहस की।
हाँ, लेकिन केवल सीमित आधारों पर। आर्बिट्रेशन एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 34 के तहत अवॉर्ड रद्द कराने की अर्ज़ी अवॉर्ड मिलने के तीन महीने के भीतर देनी होती है; पर्याप्त कारण होने पर 30 दिन और मिल सकते हैं। अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ धारा 37 के तहत अपील होती है।
हाँ। अधिनियम की धारा 9 के तहत अदालत आर्बिट्रेशन से पहले, उसके दौरान और कुछ मामलों में बाद में भी अंतरिम राहत दे सकती है; धारा 17 के तहत आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ख़ुद भी अंतरिम राहत दे सकता है।
अगर अनुबंध के अनुसार दोनों पक्ष आर्बिट्रेटर की नियुक्ति पर सहमत न हों, तो कोई भी पक्ष अधिनियम की धारा 11 के तहत नियुक्ति के लिए हाई कोर्ट में (और अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल आर्बिट्रेशन में सुप्रीम कोर्ट में) आवेदन कर सकता है।
DIAC दिल्ली हाई कोर्ट के तत्वावधान में चलने वाली आर्बिट्रेशन संस्था है। यह अपने नियमों के तहत आर्बिट्रेशन संचालित करती है और आर्बिट्रेटर्स का पैनल रखती है।
यह कानूनी प्रक्रिया के बारे में सामान्य जानकारी है, किसी विशेष मामले पर कानूनी सलाह नहीं।