जनहित और रोज़गार
उत्तर प्रदेश के 8,000 चयनित लेखपाल अभ्यर्थियों की ओर से पैरवी की, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपनी रोक हटाई और उनकी नियुक्ति का रास्ता खुला।
सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और ट्रिब्यूनलों में पदोन्नति, निलंबन, बर्खास्तगी, वेतन और पेंशन के मामले।
कुमार अभिषेक एंड एसोसिएट्स सर्विस और प्रशासनिक कानून के मामलों में शिक्षकों, प्रशासनिक कर्मचारियों व अधिकारियों, न्यायिक अधिकारियों और सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों की ओर से पैरवी करता है।
इसमें नियुक्ति और भर्ती, पदोन्नति, आरक्षण, निलंबन, बर्खास्तगी और सेवा समाप्ति, वेतन और अन्य लाभों का भुगतान, पेंशन और प्रोबेशन के मामले शामिल हैं — सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट और अन्य हाई कोर्ट तथा ट्रिब्यूनलों में।
उत्तर प्रदेश के 8,000 चयनित लेखपाल अभ्यर्थियों की ओर से पैरवी की, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपनी रोक हटाई और उनकी नियुक्ति का रास्ता खुला।
हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की पेंशन और सेवानिवृत्ति के बाद के लाभों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए; कोर्ट ने 'वन रैंक वन पेंशन' के सिद्धांत पर उनके पक्ष में फ़ैसला दिया।
अपर ज़िला न्यायाधीशों (ADJ) की पदोन्नति से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए; सेवा-शर्तों में एकरूपता का सवाल अभी तय होना बाकी है।
न्यायिक अधिकारियों (सिविल जज) के प्रोबेशन और मनमाने ढंग से सेवा समाप्त किए जाने के मामलों में सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए।
हरियाणा की अनुसूचित जाति की एक महिला न्यायिक सेवा अभ्यर्थी के लिए SLP तैयार की और पैरवी की, जिन्हें सीटें खाली होने के बावजूद मेरिट लिस्ट से बाहर कर दिया गया था।
पदोन्नति, वेतन और अन्य लाभों के भुगतान तथा मनमाने ढंग से सेवा समाप्ति के मामलों में शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से पैरवी की और उन्हें सलाह दी।
नहीं। अजय कुमार चौधरी बनाम भारत संघ (2015) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर तीन महीने के भीतर आरोप-पत्र (चार्जशीट) नहीं दिया गया है, तो निलंबन सामान्यतः तीन महीने से अधिक नहीं चलना चाहिए; आरोप-पत्र दिए जाने पर भी निलंबन बढ़ाने के लिए कारण सहित आदेश ज़रूरी है। निलंबन के दौरान कर्मचारी को सामान्यतः लागू सेवा नियमों के अनुसार निर्वाह भत्ता मिलता है।
केंद्र और राज्यों के सिविल सेवकों के लिए संविधान का अनुच्छेद 311(2) कहता है कि बर्खास्तगी, पद से हटाने या पदावनति से पहले जाँच होनी चाहिए, जिसमें कर्मचारी को आरोपों की जानकारी दी जाए और सुनवाई का उचित अवसर मिले — इसी अनुच्छेद में दिए गए कुछ सीमित अपवादों को छोड़कर।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों के सर्विस विवाद सामान्यतः पहले प्रशासनिक अधिकरण अधिनियम, 1985 के तहत केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में जाते हैं। ट्रिब्यूनल के आदेश को फिर हाई कोर्ट में और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
राज्य के अनुसार — जहाँ राज्य प्रशासनिक अधिकरण है वहाँ उसके समक्ष, अन्यथा संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका के ज़रिए हाई कोर्ट में। भर्ती परीक्षाओं और मेरिट लिस्ट से जुड़े विवाद अक्सर इसी तरह उठाए जाते हैं।
यह कानूनी प्रक्रिया के बारे में सामान्य जानकारी है, किसी विशेष मामले पर कानूनी सलाह नहीं।