सिविल मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में मूल वाद, सिविल अपील, संपत्ति और वैवाहिक विवाद।

कुमार अभिषेक एंड एसोसिएट्स नई दिल्ली से सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट और अन्य हाई कोर्ट में सिविल मुकदमे लड़ता है। इनमें मूल वाद, सिविल अपील, संपत्ति और वैवाहिक विवाद शामिल हैं — राज्यों के बीच के जटिल सीमा विवाद और सुप्रीम कोर्ट की मूल अधिकारिता के मामले भी।

हर मामले की तैयारी रिकॉर्ड को बारीकी से पढ़कर, लागू कानून पर रिसर्च करके और सावधानी से ड्राफ्टिंग करके की जाती है — पहले वाद-पत्र या लिखित बयान से लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील तक।

किन मामलों में काम करते हैं

  • मूल वाद, जिनमें दिल्ली हाई कोर्ट के ओरिजिनल साइड के मामले भी शामिल हैं
  • सुप्रीम कोर्ट में सिविल अपील और विशेष अनुमति याचिकाएँ
  • संपत्ति, टाइटल और स्वामित्व के विवाद
  • वैवाहिक और पारिवारिक विवाद
  • धार्मिक और ट्रस्ट संपत्तियों से जुड़े विवाद
  • संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत राज्यों के बीच मूल वाद
अनुभव

प्रमुख मामले और योगदान

जटिल मूल वाद

असम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के बीच दशकों पुराने सीमा विवादों से जुड़े, सुप्रीम कोर्ट में लंबित दो सबसे पुराने मूल वादों में वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ पेश हुए।

धार्मिक और संपत्ति अधिकार

प्रमुख जैन तीर्थों में पूजा के अधिकार और स्वामित्व से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। ऐसे ही एक मामले में अलग-अलग पक्षों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के 15 से अधिक वरिष्ठ अधिवक्ता पेश हुए थे।

निःशुल्क पैरवी (प्रो बोनो)

सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में छात्रों के शैक्षणिक और आपराधिक मामलों में निःशुल्क पैरवी की, जिनमें झूठी FIR रद्द कराने की याचिकाएँ भी शामिल हैं। राजस्थान और बिहार के किसानों के मामले भी लड़े।

सामान्य जानकारी

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दिल्ली में सिविल मुकदमा किस अदालत में दाख़िल होता है?

यह मुख्य रूप से मुकदमे की रक़म (मूल्य) पर निर्भर करता है। दिल्ली में ₹2 करोड़ से अधिक मूल्य के मुकदमे सामान्यतः दिल्ली हाई कोर्ट के ओरिजिनल साइड में और इससे कम के ज़िला अदालतों में दाख़िल होते हैं। कमर्शियल विवादों पर कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट, 2015 की अलग व्यवस्था लागू होती है।

सिविल मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुँचता है?

सामान्यतः अनुच्छेद 133 के तहत हाई कोर्ट से मिले प्रमाण-पत्र पर सिविल अपील के ज़रिए, या संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत विशेष अनुमति याचिका के ज़रिए।

यह कानूनी प्रक्रिया के बारे में सामान्य जानकारी है, किसी विशेष मामले पर कानूनी सलाह नहीं।

चैंबर से संपर्क

चैंबर में मुलाक़ात पहले से समय लेकर होती है। संपर्क की जानकारी और फ़ॉर्म संपर्क पेज पर उपलब्ध है।

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